Monday, June 30, 2014

रिश्ते जग के

रिश्ते जग के

रिश्तों का क्या मतलब होता ? आ कर के हमको िसखला दो ।
कैसे िजयें, िपयें गम कैसे ? बस इतना आ कर बतला दो ।

िकतना तोलें, कैसे बोलें ? कब चुप बैठें, कब मुँह खोलें ?
आज जरा आ कर के कुछ पल, ये गुर सारे हमें सुझा दो ।

मान के सब को अपना अपना, देखा था इक सुंदर सपना ।
टूटे सपने के ये टुकड़े, आ कर बैठ के पास जुड़ा दो ।

आज अतीत शूल सा चुभता, भावी भी कुछ धुंधला लगता ।
इस जमते कोहरे को आ कर, अपनी िकरणों से िपघला दो ।

सूना-सूना सा उपवन है, चुप-चुप सा सारा मधुवन है । 
इस गहराते सूनेपन को, तोड़ यहाँ जीवन िबखरा दो ।

िरश्तों का क्या मतलब होता ? आ कर के हमको िसखला दो ।

सरस्वती जोशी

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