तन्हाई से हमें कुछ ऐसा है प्यार
कि हम सरलता से मित्र बनाते नहीं हैं ।
लेकिन जब मान लेते हैं मित्र किसी को
तो फिर उससे हाथ छुड़ाते नहीं हैं ।
हालाँके जीवन ने सिखाया बार-बार
कि लोग जीवन भर रिश्ते निभाते नहीं हैं ।
और उनकी बेरुखी का अहसास जब दिल तोड़ता है
तो घाव आसानी से भर पाते नहीं हैं !
वैसे गर जिंदगी भर के लिये मित्र बनाने का मन हो ।
तो मीरा या सूर सा सुंदर चयन हो
। मित्र ऐसा निलेगा कि मन मोह लेगा ।
इह लोक-पर लोक सुधार देगा !
सरस्वती जोशी
सरस्वती जोशी

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