Monday, June 16, 2014

है इक छोटा सा संदेश ।



34) मैंने पुत्र-दिवस "Son's Day" या पुत्री-दिवस "Daughter's Day" नहीं बनाया । 
पर मेरे जीवन के हर पल ने मुझको है बस यही सिखाया । 
नहीं चाहिये "विशेष-दिन" या यशोगान, न ही समारोह की शाम । 
तुम्हीं मेरे "Raison de Vivre", तुम संजीवनी, तुम ही जीवन । 
गर दे पाओ कुछ करुणा के कण, स्नेह भरे कुछ थोड़े क्षण । 
मानव मान सहज सा जीवन, ले पाऊँ तुमसे अपनापन ।
कह पाऊँ जो चाहे यह मन, समझूँगी सफल हो गया जीवन ।


पर यह नहीं कोई आदेश । है इक छोटा सा संदेश । 
क्योंकि तुम्हारे जन्म हेतु मैंने तो प्रभुको दिया वचन : 
निष्काम भाव से करूँ समर्पण, न बदले मे कुछ चाहे मेरा मन । 
सो मान प्रभु का वह अहसान । अपने वचन का रखना है मान ।

सरस्वती जोशी
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