34) मैंने पुत्र-दिवस "Son's Day" या पुत्री-दिवस "Daughter's Day" नहीं बनाया ।
पर मेरे जीवन के हर पल ने मुझको है बस यही सिखाया ।
नहीं चाहिये "विशेष-दिन" या यशोगान, न ही समारोह की शाम ।
तुम्हीं मेरे "Raison de Vivre", तुम संजीवनी, तुम ही जीवन ।
गर दे पाओ कुछ करुणा के कण, स्नेह भरे कुछ थोड़े क्षण ।
मानव मान सहज सा जीवन, ले पाऊँ तुमसे अपनापन ।
कह पाऊँ जो चाहे यह मन, समझूँगी सफल हो गया जीवन ।
पर यह नहीं कोई आदेश । है इक छोटा सा संदेश ।
क्योंकि तुम्हारे जन्म हेतु मैंने तो प्रभुको दिया वचन :
निष्काम भाव से करूँ समर्पण, न बदले मे कुछ चाहे मेरा मन ।
सो मान प्रभु का वह अहसान । अपने वचन का रखना है मान ।
सरस्वती जोशी
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