Monday, June 16, 2014

समझी जिसने अनकही कथा ।

Mere ek bhaiya hain Mr. Sampat Sharma, ve Compu. ke visheshagya hain yah tasvir unki or se unke jijaji Late Dr. Vraj Raj Joshi ko ek sneh-bhara present hai. Thanks bhaiya Sampatji !
भैया संपतजी ! 
किन शब्दों में दूँ आज धन्यवाद !
मूक वाणी, हृदय विचलित, 
सारा अतीत आ गया याद । 
पता नहीं के इन नयनों में,
आनंद है या भरा विषाद । 
पर इन टपके अश्रुकणों में,
उस अतीत को हूँ निहारती । 
जिसको विस्मित कर देने को,
जगती मुझको है पुकारती ।
चिरजीवी हो भाई मेरा ! 
जिसको दिखती यह मूक व्यथा । 
दूर बसी इक बहना की,
समझी जिसने अनकही कथा । 
सरस्वती जोशी


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