तुम उसके लिए शोक करते हो जो शोक करने के योग्य नहीं हैं,
और फिर भी ज्ञान की बाते करते हो| बुद्धिमान व्यक्ति ना जीवित और
ना ही मृत व्यक्ति के लिए शोक करते हैं|
श्रीमद्भगवद्गीता
कितना अच्छा लगता है जब सुनते हैं ये उपदेश ।
पर जब अपनी बारी आती है तो भूलते सब संदेश ।
लाख रोकने पर भी लफ्ज़ ओठों पे आ ही जाते हैं ।
न चाहने पर भी बन बेवफा, घर की कहानी बयाँ कर जाते हैं ।
गर राम (वन गमन के समय) वाल्मीकि को आपबीती ना सुनाते ।
तो शायद रामायण से ग्रंथ रोशनी में न आते ।
सीता ने भी चाहे अपनी असली पहचान तो छिपाई ।
बन के वनदेवी वन में उमर बिताई ।
पर बहते आँसुओं पे काबू कर नहीं वह पाई ।
अपने बेटों से कहानी घर की जगत को सुनवाई ।
सरस्वती जोशी
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