Wednesday, June 25, 2014

न चाहने पर भी बन बेवफा



तुम उसके लिए शोक करते हो जो शोक करने के योग्य नहीं हैं, 
और फिर भी ज्ञान की बाते करते हो| बुद्धिमान व्यक्ति ना जीवित और
 ना ही मृत व्यक्ति के लिए शोक करते हैं|

श्रीमद्भगवद्गीता

कितना अच्छा लगता है जब सुनते हैं ये उपदेश । 
पर जब अपनी बारी आती है तो भूलते सब संदेश । 
लाख रोकने पर भी लफ्ज़ ओठों पे आ ही जाते हैं । 
न चाहने पर भी बन बेवफा, घर की कहानी बयाँ कर जाते हैं । 
गर राम (वन गमन के समय) वाल्मीकि को आपबीती ना सुनाते । 
तो शायद रामायण से ग्रंथ रोशनी में न आते । 
सीता ने भी चाहे अपनी असली पहचान तो छिपाई । 
बन के वनदेवी वन में उमर बिताई । 
पर बहते आँसुओं पे काबू कर नहीं वह पाई । 
अपने बेटों से कहानी घर की जगत को सुनवाई । 
सरस्वती जोशी

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