Saturday, June 28, 2014

बेलन की महान महिमा तो केवल नारी ही कह सकती है ।


घर में "सम्पत" बनाये रखने के अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण "बेलन" की महिमा 

बेलन महिमा 

बेलन-महिमा हर घर गाता । गरम-गरम रोटी खिलवाता ।
लाल, गुलाबी, नीला, पीला, कई रूप धर सकता है।

लकड़ी, लोहा, पीतल सबसे कुछ पल में बन सकता है ।
मोटा, पतला, जैसा घड़लो काम में तत्पर रहता है ।
दिखने में सुंदर प्यारा औ छिपे कई गुण रखता है ।
गृहणी का शस्त्र कहलाता । घरकों को सही रास्ते पे लाता ।


अगर कमर में दर्द हुआ हो, मंत्रोच्चार कर बेलन घुमाओ ।
सात बार बोलते जाओ । दर्द से अपने निजात पाओ ।
माँ संझा के किला-कोट में देखो तुम बेलन का रूप ।
सास-हस्त में ऊपर उठ कर दिखलाता भीषण स्वरूप ।

गृहिणी की परम शक्ति का यह है कितना सुंदर प्रतीक ।
जो ऊपर उठ जाये तो बहुओं को कर देता ठीक ।
पर गर हाथ बहू के आए । तो घर में कुराम मचाए ।
बेटी को दहेज में देखो ! कभी भूल मत दे देना ।
सास-बहू के महाभारत का तुम अपयश मत ले लेना !


सकल विश्व की नारी एकता का यह बन सकता प्रतीक ।
मानो चाहे ना मानो पर बात हमारी बिल्कुल ठीक ।
बेलन की घटनाओं पर तो बेलन-पुराण लिख सकते हैं ।
यह तो है हर घर की शोभा अखबार भी महिमा कहते हैं ।


केवल लाईक लिख देना तो अमोघ शस्त्र का है अपमान ।
कुछ और नहीं गर कर पाओ तो झुक कर के तो करो प्रणाम ।
बेलन की महान महिमा तो केवल नारी ही कह सकती है ।
क्योंके वह निष्काम भाव से बेलन-भक्ति करती है ।

यह अर्जुन-भीम की कथा नही जो सभी रहस्य समझ पाएँ ।
वेदव्यास के छक्के छूटें जो बेलन की महिमा गाएँ ।
भैया संपत ! विषय-चयन में भूल जरासी कर दी है ।
हो कंप्यूटर-भक्त मगर बेलन-भक्ति की बात चला दी है ।

हे बेलन ! बहुसंख्यक पुरुषों ने माना आपको पीटनहार !
आज सबक देने को उनको हो जाओ तैयार !
आज शाम हे नारी-रक्षक ! जाना उनसे रूठ !
जब घर में रोटी बेलें तो जाना फटसे टूट !


समझा देना उनको चाहे युग कम्प्यूटरजी का आया !
बेलन की सत्ता-महिमा में फर्क नहीं वह कर पाया !
तव यशोगान की नन्ही कविता भी पढ़ नहीं ये पाते !
"बेलन चालीसा" होता तो जाने क्या कर जाते !


सरस्वती जोशी

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