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Monday, June 16, 2014
उर में उसका मृदु हास रहे ।
जब जीवन नाम ही तप का है,
तो तप में दुख का अहसास क्यों ?
तपस्या का परिहास क्यों?
अवधि का आभास क्यों ?
कुछ पाने की आस क्यों ?
"तप सदा सार्थक होता है,"
बस मन में यही विश्वास रहे ।
जो शक्ति दे रहा करने की,
उर में उसका मृदु हास रहे ।
सरस्वती जोशी
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