जीवन के विभिन्न पहलू
हर बार जब जीवन के ऐसे पहलू सामने हैं आते ।
तो फिर ताज, महल, मीनारों़ का सार समझ ना हम पाते ।
मानव अपने जीवन का क्या बस यही अर्थ समझ पाया ?
भूखे को रोटी, नंगे को वसन तक उपलब्ध नहीं वह कर पाया ।
पर गर्व उसे के वह चाँद तलक पर जा कर दर्शन कर आया ।
स्व निर्मित यंत्रों से जा कर शनि-गुरु तक छू आया ।
बादलों को फोड़-फोड़ पानी बरसाना सीख लिया ।
ईश्वर भी रह जाय चकित वह सब करना है सीख लिया ।
गर इस धरती पर फिरभी कुछ भूखे-नंगे फिरते हैं ।
"तो यह उनके कर्मों का फल,..." गीता के कृष्ण तक कहते हैं ।
"जैसी करनी वैसी भरनी... कर्म-फल मिटाना मुश्किल ।
सुख देना उनको नहीं सरल,... यह तो उनकी करनी का फल ।..."
सोच : "यही प्रभु की इच्छा, " कर लेते हल्का मन का भार ।
"पत्थर तक अपनी किस्मत लाता,... इसीको कहते हैं संसार !..."
सरस्वती जोशी
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