Monday, July 14, 2014

जीवन के विभिन्न पहलू



जीवन के विभिन्न पहलू

हर बार जब जीवन के ऐसे पहलू सामने हैं आते । 
तो फिर ताज, महल, मीनारों़ का सार समझ ना हम पाते ।


मानव अपने जीवन का क्या बस यही अर्थ समझ पाया ? 
भूखे को रोटी, नंगे को वसन तक उपलब्ध नहीं वह कर पाया ।

पर गर्व उसे के वह चाँद तलक पर जा कर दर्शन कर आया । 
स्व निर्मित यंत्रों से जा कर शनि-गुरु तक छू आया ।

बादलों को फोड़-फोड़ पानी बरसाना सीख लिया । 
ईश्वर भी रह जाय चकित वह सब करना है सीख लिया ।

गर इस धरती पर फिरभी कुछ भूखे-नंगे फिरते हैं । 
"तो यह उनके कर्मों का फल,..." गीता के कृष्ण तक कहते हैं ।

"जैसी करनी वैसी भरनी... कर्म-फल मिटाना मुश्किल । 
सुख देना उनको नहीं सरल,... यह तो उनकी करनी का फल ।..."

सोच : "यही प्रभु की इच्छा, " कर लेते हल्का मन का भार । 
"पत्थर तक अपनी किस्मत लाता,... इसीको कहते हैं संसार !..."

सरस्वती जोशी

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