सच्ची-सरल हँसी-मुस्कुराहट के चार पल ।
सुंदर-सुहने, सजल-सजल ।
जिन्हें ढूँढते सब सदा ही प्रति पल ।
सोच कर कि इन्हें पाना है सरल ।
रखते सब पाने की इच्छा प्रबल ।
किंतु क्या "राम" कभी खुल कर हँस पाये ?
क्या सीता के जीवन में ऐसे क्षण आये ?
ख़ुश रहना रख कायम संयम महान ।
आनंद-क्षोभ सबको कर के समान ।
न खोना कभी भी अपना संतुलन ।
न सुख में इतराना न दुख में क्रंदन ।
हर स्थिति का करना धीरज से सामना ।
सुख-दुख की अनुभूति से परे रहने की कल्पना ।
सम भाव से दोनों को स्वीकार करना ।
बन एक द्रष्टा निज कर्म करते रहना ।
आसाँ नहीं है यह मुश्किल है काम ।
जो यह कर पाये वह बन जाता महान ।
जिसे प्राप्त हो जाय यह संभावना ।
उसे करनी चाहिये प्रभु की वंदना ।
मानो उस पर हरि की कृपा महान ।
जो दे दिया उसे इक दुर्लभ वरदान ।
सरस्वती जोशी
सुंदर-सुहने, सजल-सजल ।
जिन्हें ढूँढते सब सदा ही प्रति पल ।
सोच कर कि इन्हें पाना है सरल ।
रखते सब पाने की इच्छा प्रबल ।
किंतु क्या "राम" कभी खुल कर हँस पाये ?
क्या सीता के जीवन में ऐसे क्षण आये ?
ख़ुश रहना रख कायम संयम महान ।
आनंद-क्षोभ सबको कर के समान ।
न खोना कभी भी अपना संतुलन ।
न सुख में इतराना न दुख में क्रंदन ।
हर स्थिति का करना धीरज से सामना ।
सुख-दुख की अनुभूति से परे रहने की कल्पना ।
सम भाव से दोनों को स्वीकार करना ।
बन एक द्रष्टा निज कर्म करते रहना ।
आसाँ नहीं है यह मुश्किल है काम ।
जो यह कर पाये वह बन जाता महान ।
जिसे प्राप्त हो जाय यह संभावना ।
उसे करनी चाहिये प्रभु की वंदना ।
मानो उस पर हरि की कृपा महान ।
जो दे दिया उसे इक दुर्लभ वरदान ।
सरस्वती जोशी

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