माला जपना तो उतना ज़रूरी नहीं ।
पर हथियार उठाना भी हितकारी नहीं ।
क्या तलवारें राम-रावण युद्ध में कल्याणकारी रहीं ।
काश रावण सीख सुन कर ही हो जाता सही ।
सीता को लौटा अपने कुल को बचाता ।
सीता के शेष जीवन में भी न तूफान आता ।
डाकू हो कर भी रत्नाकर निकला समझदार ।
संतों की बात मान उसने त्यागे हथियार ।
बन के संत वाल्मिकि आश्रम बसाया ।
सीता से दुखियों का कष्ट मिटाया ।
राम-कथा का अमर काव्य रचाया ।
राम के जीवन का सत्य सुनाया ।
जीवन पथ पार करने का मार्ग बताया ।
कितनों को भव से पार कराया ।
सरस्वती जोशी
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