Tuesday, July 8, 2014

माला जपना तो उतना ज़रूरी नहीं ।

माला जपना तो उतना ज़रूरी नहीं । 
पर हथियार उठाना भी हितकारी नहीं । 

क्या तलवारें राम-रावण युद्ध में कल्याणकारी रहीं । 
काश रावण सीख सुन कर ही हो जाता सही । 

सीता को लौटा अपने कुल को बचाता । 
सीता के शेष जीवन में भी न तूफान आता । 

डाकू हो कर भी रत्नाकर निकला समझदार । 
संतों की बात मान उसने त्यागे हथियार । 

बन के संत वाल्मिकि आश्रम बसाया । 
सीता से दुखियों का कष्ट मिटाया । 

राम-कथा का अमर काव्य रचाया । 
राम के जीवन का सत्य सुनाया । 

जीवन पथ पार करने का मार्ग बताया ।
कितनों को भव से पार कराया ।

सरस्वती जोशी

No comments:

Post a Comment