बारिश में भीगे वे बचपन के कुछ पल !
देखो तस्वीर के इन लम्हों को करो ज़रा ग़ौर !
कौन है ऐसा जिसे दिखेगा कोई और ?
हरेक इसमें कहीं ख़ुद को छिपा पाएगा ।
और उसे अपना बचपन याद आएगा ।
कभी स्कूल से आते, कभी बाज़ार जाते ।
कभी खेतों में, खलिहानों में,
कभी घर के पास के गलियारों में ।
वे बेफिक्री से बीते, बारिश में भीगे ।
हँसी-ख़ुशी के कुछ पल, थे कितने सुंदर सजल !
सुंदर भोले से सपनों से गये वे सब बीत ।
इस व्यस्त जीवन के बन गये अतीत !
पर आज भी याद आते हैं बार-बार !
कर देते हैं मानस में ख़ुशियों का संचार !
सरस्वती जोशी

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