Friday, July 4, 2014

बारिश में भीगे वे बचपन के कुछ पल !



बारिश में भीगे वे बचपन के कुछ पल !

देखो तस्वीर के इन लम्हों को करो ज़रा ग़ौर ! 
कौन है ऐसा जिसे दिखेगा कोई और ? 
हरेक इसमें कहीं ख़ुद को छिपा पाएगा । 
और उसे अपना बचपन याद आएगा ।


कभी स्कूल से आते, कभी बाज़ार जाते । 
कभी खेतों में, खलिहानों में, 
कभी घर के पास के गलियारों में । 
वे बेफिक्री से बीते, बारिश में भीगे । 
हँसी-ख़ुशी के कुछ पल, थे कितने सुंदर सजल !

सुंदर भोले से सपनों से गये वे सब बीत । 
इस व्यस्त जीवन के बन गये अतीत ! 
पर आज भी याद आते हैं बार-बार ! 
कर देते हैं मानस में ख़ुशियों का संचार !

सरस्वती जोशी

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