अनजान ेश, सुनसान राहें ! अकेले हम, संग भूली बिसरी यादें !
साधना जोशी-सुखवाल
साधना जोशी-सुखवाल
जिस देश ने अपनत्व दिया,
वह अनजाना नहीं हो सकता ।
उससे कहीं नाता पुराना,
वह बिल्कुल वीराना/बेगाना नहीं हो सकता ।
दिशा हीन जीवन को दिशा दिखाई जिन राहों ने,
वह पथ इतना तो सुनसान नहीं हो सकता ।
गर भूली-बिसरी ही सही पर यादें साथ में रहती हैंं,
तो फिर वह राही कभी निपट अकेला नहीं हो सकता ।
ज़रा सी सोच को बदल कर देखोगे अलग निगाहों से,
तो सच कहते हैं ऐ साथी ! पग-पग पर पाओगे के,
प्रभु से पाया है जो कुछ उसमें चाहे हो खट्टा-मीठा,
पर उसके अहसान से यह जीवन उरिण कभी नहीं हो सकता ।
सरस्वती जोशी
वह अनजाना नहीं हो सकता ।
उससे कहीं नाता पुराना,
वह बिल्कुल वीराना/बेगाना नहीं हो सकता ।
दिशा हीन जीवन को दिशा दिखाई जिन राहों ने,
वह पथ इतना तो सुनसान नहीं हो सकता ।
गर भूली-बिसरी ही सही पर यादें साथ में रहती हैंं,
तो फिर वह राही कभी निपट अकेला नहीं हो सकता ।
ज़रा सी सोच को बदल कर देखोगे अलग निगाहों से,
तो सच कहते हैं ऐ साथी ! पग-पग पर पाओगे के,
प्रभु से पाया है जो कुछ उसमें चाहे हो खट्टा-मीठा,
पर उसके अहसान से यह जीवन उरिण कभी नहीं हो सकता ।
सरस्वती जोशी
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