मंज़िल
मंज़िल मिले न मिले,
पर उसे पाने का उत्साह,
दिखलाता है राह,
देता चलने की चाह,
उससे थकते नहीं पाँव,
और सरलता से कटती है राह,
इसलिये मंजिल का महत्व,
परमात्मा से कम नहीं ।
सरस्वती जोशी
मंज़िल मिले न मिले,
पर उसे पाने का उत्साह,
दिखलाता है राह,
देता चलने की चाह,
उससे थकते नहीं पाँव,
और सरलता से कटती है राह,
इसलिये मंजिल का महत्व,
परमात्मा से कम नहीं ।
सरस्वती जोशी
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