Sunday, August 17, 2014

यह मीठे जल की सुंदर नदिया कहलाती है "खारी" !

यह मीठे जल की सुंदर नदिया कहलाती है "खारी" ! 
जगती के निर्णय के आगे बेबस है बेचारी ! 
कारण इसका जान न पाई । 
मीठा जल ही दिया सदा ही । 
कोई कहता : "इसके उद्गम से जुड़ी किसी की अश्रुधार ।" 
कोई कहता : "उफन पड़े तो मचा दे भारी हाहाकार ।" 
पर जो भी हो "खारी" संबोधन कुछ विचित्र सा लगता है । 
मेरा मानस तो इसको "मीठी" कहने को करता है । 
सरस्वती जोशी

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