Tuesday, August 5, 2014

भैया सम्पत जी ! जन्म-दिवस की

तुम इतनी कविताएँ रच दो के चारों ओर तुम्हें ही पाएँ । 
तुम्हारी वाणी के हर स्वर में मात शारदा बस जाएँ । 
हर तन्हा की तन्हाई इन कविताओं से मिट जाए ! 
हर आँख के आँसू सूखें हर प्राणी मुसकाए । 
कवि तुम्हारी वाणी में कुछ ऐसा स्वर भर जाए । 
जो हर निर्बल प्राणी में दिव्य शक्ति जगाए । 
स्वर तुम्हारे पत्थर में भी नई चेतना भर दें । 
भारत का प्रकाश फैला कर जग को जगमग कर दें । 
सरस्वती जोशी
भैया सम्पत जी ! जन्म-दिवस की हार्दिक मंगल कामनाएँ ! आपने मेरी कविताओं को इंटरनेट में लगाने में मेरी जो सहायता की उसके लिये हार्दिक धन्यवाद व जन्म-दिवस का हार्दिक शुभाशीष ! आपको, सौ० भाभीजी को, चि० प्रिय मुन्ने व आपके माताजी-पिताजी को हार्दिक बधाई ! आपकी दीदी सरस्वती

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