Tuesday, September 9, 2014

मेरे पिता स्वर्गीय श्री माँगीलालजी सुखवाल को सादर समर्पित

मेरे पिता स्वर्गीय श्री माँगीलालजी सुखवाल को सादर समर्पित
हो सकता है आज समय वह जिसका कभी न देखा सपना । 
पर अतीत के गर्भ में छिपा हुआ जो जीवन अपना ।

जिसकी बदौलत मिलते रहे साहस, शक्ति औ प्रेरणा । 
आज है परिणाम जिसका, जिससे जागी थी चेतना ।

हैं अत्यंत मूल्यवान वे कष्टभरी बीती घड़ियाँ । 
शुरू हुआ जप जिन मनकों से उस माला की पावन लड़ियाँ ।

उन्हीं में कहीं वह दिव्य शक्ति है जिसने भावी मार्ग दिखाया । 
वर्तमान का जीवन जिससे बन ज्योतिर्मय जगमगाया ।

सरस्वती जोशी

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