पिता
हम सदा या अधिकतर माँ का गुणगान करते नहीं थकते !
यह सच है कि नाता गर्भ में धारण करने, जन्म देने, पालने की,
हमारे स्वास्थ्य-भोजन-वस्त्र, हमारे सुख-दुख बाँटने आदि की भूमिका माँ निभाती है ।
पर ध्यान से सोचें तो माँ की भूमिका जहाँ से समाप्त होती है,
पिता की वहाँ से प्रारंभ होती है और फिर कभी समाप्त नहीं होती,
हमारी शिक्षा-दीक्षा, हमें परिवार में, समाज में, संसार में समुचित
स्थान दिलाने, हमें उन्नत बनाने, हमारे जीवन को सफल-सम्माननीय
बनाने, हमारी महत्वाकांक्षाओं को जगाने, हमें सशक्त बनाने,
उत्साह देने व हमारा हर दुख या जीवन की बाधा मिटाने में पिता
अपनी जान लड़ा देता है, और यह सब बिना गिनाये, अपनी
इज्जत को हमारी इज्जत से जोड़, हमारी उन्नति को अपनी
उन्नति मान कर, बिना अहसान जताए, मूक तपस्वी की तरह
करता चला जाता है ! मैं केवल मेरे ही नहीं हर उस
पिता को प्रणाम करती हूँ जो इतना महान है !
सरस्वती जोशी
हम सदा या अधिकतर माँ का गुणगान करते नहीं थकते !
यह सच है कि नाता गर्भ में धारण करने, जन्म देने, पालने की,
हमारे स्वास्थ्य-भोजन-वस्त्र, हमारे सुख-दुख बाँटने आदि की भूमिका माँ निभाती है ।
पर ध्यान से सोचें तो माँ की भूमिका जहाँ से समाप्त होती है,
पिता की वहाँ से प्रारंभ होती है और फिर कभी समाप्त नहीं होती,
हमारी शिक्षा-दीक्षा, हमें परिवार में, समाज में, संसार में समुचित
स्थान दिलाने, हमें उन्नत बनाने, हमारे जीवन को सफल-सम्माननीय
बनाने, हमारी महत्वाकांक्षाओं को जगाने, हमें सशक्त बनाने,
उत्साह देने व हमारा हर दुख या जीवन की बाधा मिटाने में पिता
अपनी जान लड़ा देता है, और यह सब बिना गिनाये, अपनी
इज्जत को हमारी इज्जत से जोड़, हमारी उन्नति को अपनी
उन्नति मान कर, बिना अहसान जताए, मूक तपस्वी की तरह
करता चला जाता है ! मैं केवल मेरे ही नहीं हर उस
पिता को प्रणाम करती हूँ जो इतना महान है !
सरस्वती जोशी
No comments:
Post a Comment