मेरी भाभी
गौर वर्ण, मासूम सी सूरत,
निश्छल सी है उसकी चितवन ।
लक्ष्मी जैसी भाभी मेरी,
करती हर पल शिव-आराधन ।
परम विनीता, पूर्ण शिक्षिता,
परहित हेतु सदा रत रहती ।
सहिष्णुता मे लगती मानो,
नारी रूप में आई "धरती" ।
सरल हृदय, हँसमुख स्वभाव,
बालक सी उसकी मुस्कान ।
भैया के मानस की ज्योति,
है वह सर्व गुणों की खान ।
- सरस्वती जोशी
For Dr. Lakshmi Sukhwal
गौर वर्ण, मासूम सी सूरत,
निश्छल सी है उसकी चितवन ।
लक्ष्मी जैसी भाभी मेरी,
करती हर पल शिव-आराधन ।
परम विनीता, पूर्ण शिक्षिता,
परहित हेतु सदा रत रहती ।
सहिष्णुता मे लगती मानो,
नारी रूप में आई "धरती" ।
सरल हृदय, हँसमुख स्वभाव,
बालक सी उसकी मुस्कान ।
भैया के मानस की ज्योति,
है वह सर्व गुणों की खान ।
- सरस्वती जोशी
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