माँ की मुस्कुराहट
माँ ! मन करता है,
तुझसे फिर मिल पाऊँ !
वह बचपन की हँसी फिरसे जगा,
जी भर के खिलखिलाऊँ !
तुझसे फिर मिल पाऊँ !
वह बचपन की हँसी फिरसे जगा,
जी भर के खिलखिलाऊँ !
तू मुझको "हँसते समय.
लड़कियाँ दाँत नहीं दिखातीं",
का उपदेश दे समझाए !
पर मेरी नादानी पर,
तुझे भी हँसी आ जाए ।
लड़कियाँ दाँत नहीं दिखातीं",
का उपदेश दे समझाए !
पर मेरी नादानी पर,
तुझे भी हँसी आ जाए ।
तू मुझे रोकती जाए,
पर स्वयं खिलखिलाए ।
और समय का वह पल,
बस वहीं पर रुक जाए ।
पर स्वयं खिलखिलाए ।
और समय का वह पल,
बस वहीं पर रुक जाए ।
ऐ काश कि ऐसा हो पाए !
माँ तू मेरे पास बैठ,
फिरसे हँसने के नियम बताए ।
औ मेरे साथ मुस्कुराने के प्रयत्न में,
स्वयं नियम वे भूल जाए ।
माँ तू मेरे पास बैठ,
फिरसे हँसने के नियम बताए ।
औ मेरे साथ मुस्कुराने के प्रयत्न में,
स्वयं नियम वे भूल जाए ।
- सरस्वती जोशी
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