उनकी तस्वीर
आज फिर मुस्कुराये उनकी तस्वीर में उन्हें पाने के लिये ।
आँसुओं ने बहने का तकाजा किया हमें रुलाने के लिये ।
आँसुओं ने बहने का तकाजा किया हमें रुलाने के लिये ।
हालाँके समंदर के खारे जल को पी पाना इतना सरल नहीं !
फिरभी हम पीने लगे उसे चुपचाप दर्द छिपाने के लिये ।
फिरभी हम पीने लगे उसे चुपचाप दर्द छिपाने के लिये ।
कुछ पल को मधुर स्मृतियों में डूब जाने के लिये ।
खुद हँस कर उन्हें फिर अपने साथ हँसाने के लिये ।
खुद हँस कर उन्हें फिर अपने साथ हँसाने के लिये ।
लेकिन विफल हो गये हम, बूँदें टपकने ही लगीं तस्वीर पर !
उन्हें पोंछने के प्रयास में सुखाते रहे अपने अंतर में भरा समंदर !
उन्हें पोंछने के प्रयास में सुखाते रहे अपने अंतर में भरा समंदर !
- सरस्वती जोशी
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