Friday, November 14, 2014

कुछ प्रश्न (उस प्रभु से)

कुछ प्रश्न (उस प्रभु से)
हे प्रभु ! तुझे मन से अपना मानने पर भी,
न जाने क्यों कुछ प्रश्न मुझको सताते हैं बार-बार ?
अपनी करुणा का दान देने से पहले,
मुझे इस कदर झुकाना क्यों ज़रूरी था बार-बार ?
कुछ कण मुस्कुराहट के देने से पहले,
मुझे इस कदर रुलाना क्यों ज़रूरी था बार-बार ?
अपना वरद हस्त मेरी ओर बढ़ाने से पहले,
मुझे इस कदर तरसाना क्यों ज़रूरी था बार-बार ?
अपनी मुरली का मधुर संगीत सुनाने से पहले,
मेरा विरह राग गाना क्यों ज़रूरी था बार-बार ?
- सरस्वती जोशी

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