क्यों आते वे िदन िफर याद ?
क्यों आते वे िदन िफर याद ?
कहते सब: "बीती बातों को भूलो, मत वह बात करो ! "
जो कुछ पाया है मधुमय, बस उसको तोलो माप करो..."
िफर इस मधुमय रस के भीतर, लगता क्यों कुछ कड़वा स्वाद ! ...
कहते सब: "बीती बातों को भूलो, मत वह बात करो ! "
जो कुछ पाया है मधुमय, बस उसको तोलो माप करो..."
िफर इस मधुमय रस के भीतर, लगता क्यों कुछ कड़वा स्वाद ! ...
सुनते हैं : "है प्यार भरा, यह रसमय सारा ही संसार ।
जीवन है हँस-हँस जीने को, करते जाअो सब को प्यार ।"
हँसते-हँसते ही आ जाता, क्यों िफर नयनों में यह खार ! ...
जीवन है हँस-हँस जीने को, करते जाअो सब को प्यार ।"
हँसते-हँसते ही आ जाता, क्यों िफर नयनों में यह खार ! ...
सुनते जब उपदेश िकसीके, सीने में क्यों उठता ज्वार ?
क्यों इस मन का कोई कोना, व्याकुल हो करता चीत्कार ?
क्यों मन करता कोई सुन ले, कभी बैठ कर मन की बात ? ...
क्यों इस मन का कोई कोना, व्याकुल हो करता चीत्कार ?
क्यों मन करता कोई सुन ले, कभी बैठ कर मन की बात ? ...
क्यों दे कोई भला िकसीको, अपनी मुस्कानों के कुछ क्षण ?
िफर भी जाने-अनजाने में, यही चाहता है पागल मन ।
कहीं िमले कोई अपना जो, दे दे कुछ क्षण की सौगात ! ...
िफर भी जाने-अनजाने में, यही चाहता है पागल मन ।
कहीं िमले कोई अपना जो, दे दे कुछ क्षण की सौगात ! ...
िकतना चाहें अब न करें हम, कभी कहीं दुखड़े की बात ।
झोली भर मुस्कानों की हम, खुिशयों की कर दें बरसात ।
पर िनर्धन के बस में है क्या, दे दे मुस्कानों का मोल ?
कैसे चुकाए, कैसे पाए, कौन सुने उसकी फरियाद ?...
क्यों आते वे िदन िफर याद ?
झोली भर मुस्कानों की हम, खुिशयों की कर दें बरसात ।
पर िनर्धन के बस में है क्या, दे दे मुस्कानों का मोल ?
कैसे चुकाए, कैसे पाए, कौन सुने उसकी फरियाद ?...
क्यों आते वे िदन िफर याद ?
- सरस्वती जोशी
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