Friday, November 14, 2014

दूध को रोता बालक

दूध को रोता बालक
"दूध-दूध !" कह रोता बालक, माँ के आँचल में चिल्लाया ।
धरती तो धरती, अंबर तक उसके क्रंदन से थर्राया ।
विद्युत का वज्र कठोर हिया, इक पल करुणा से भर आया ।
पर मानव को मानव-सुत की, इस दीन दशा का होश न आया ।
हे शिव शंकर ! बस यह बतला यह कैसी तेरी माया ?
तूने भेज जगत में उसको, कैसा प्रभुवर खेल रचाया ?
- सरस्वती जोशी

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