मित्रों का आभार
मेरे मित्रो ! आप सबने जाने या अनजाने में,
पता नहीं पर कितने तन्हाई के क्षणों को आबाद किया।
कितने अश्रु भरे उदास पलों को अपनी हँसी से भर दिया ।
इन स्नेह सिक्त माधुर्य भरे हर क्षण का यह सुंदर उपहार ।
जो अविरत देते रहना सबने किया हँस-हँस सहर्ष स्वीकार ।
इसमें जो अपनत्व भरा उसमें कुछ ऐसी हमदर्दी है घुली ।
इस मानस पर छाती निराशा औ गिरते मनोबल को,
अपना मान हाथ पकड़ने से शक्ति अलौकिक है मिली ।
इन अमूल्य स्नेह कणों का मानूँगी सदा आभार ।
अपने अंतर मन से भेजूँगी दुआएँ अनेक बार-बार !
- सरस्वती जोशी
मेरे मित्रो ! आप सबने जाने या अनजाने में,
पता नहीं पर कितने तन्हाई के क्षणों को आबाद किया।
कितने अश्रु भरे उदास पलों को अपनी हँसी से भर दिया ।
इन स्नेह सिक्त माधुर्य भरे हर क्षण का यह सुंदर उपहार ।
जो अविरत देते रहना सबने किया हँस-हँस सहर्ष स्वीकार ।
इसमें जो अपनत्व भरा उसमें कुछ ऐसी हमदर्दी है घुली ।
इस मानस पर छाती निराशा औ गिरते मनोबल को,
अपना मान हाथ पकड़ने से शक्ति अलौकिक है मिली ।
इन अमूल्य स्नेह कणों का मानूँगी सदा आभार ।
अपने अंतर मन से भेजूँगी दुआएँ अनेक बार-बार !
- सरस्वती जोशी