प्रोफेसर श्रीमती कैथरीन तोमा को सस्नेह,
जिनकी मैं सदा रिणी रहूँगी -
जिनकी मैं सदा रिणी रहूँगी -
कुछ मित्र मिले ऐसे मिले जीवन में,
दे दिया कुछ यूँ सहारा ।
डूबती सी नाव को भी,
मिल गया अपना किनारा ।
उनको यह मालूम नहीं,
कर दिया कितना उपकार ।
केवल करुणा के वश होकर ही,
लगा दिया नैया को पार ।
उनके रिण से दबा है कोई,
यह भी ज्ञात नहीं उनको ।
केवल कुछ पल साथ रहे बस,
फिर ना मिले कभी हमको ।
जाने कौन राह पकड़ी फिर,
यह तक हमको नहीं पता।
दूर-दूर से भेजेंगे पर,
उन्हें दुआ अपनी सदा ।
-सरस्वती जोशी
दे दिया कुछ यूँ सहारा ।
डूबती सी नाव को भी,
मिल गया अपना किनारा ।
उनको यह मालूम नहीं,
कर दिया कितना उपकार ।
केवल करुणा के वश होकर ही,
लगा दिया नैया को पार ।
उनके रिण से दबा है कोई,
यह भी ज्ञात नहीं उनको ।
केवल कुछ पल साथ रहे बस,
फिर ना मिले कभी हमको ।
जाने कौन राह पकड़ी फिर,
यह तक हमको नहीं पता।
दूर-दूर से भेजेंगे पर,
उन्हें दुआ अपनी सदा ।
-सरस्वती जोशी
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